Alif Laila Story - ( Part - 7 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी ( 5037 )

Alif Laila Story - ( Part - 7 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी

Alif Laila Story - ( Part - 7 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
Alif Laila Story - ( Part - 7 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी


जहाज के कप्तान ने तुरंत कमरुज्जमां को पकड़कर जबरदस्ती जहाज पर बैठा दिया। शहजादा चिल्लाता रहा कि मुझे क्यों इस तरह से जहाज पर चढ़ा रहे हो। तब उसने कहा कि तुम पर अवौनी राज्य का काफी कर्ज है, इसलिए वहां के मंत्री ने तुम्हें तुरंत बुलाया है। उसने जहाज के कप्तान को बार-बार कहा कि मैंने किसी से कोई कर्ज नहीं लिया है, लेकिन उसने उसकी एक बात नहीं सुनी। कुछ दिनों बाद जहाज अवौनी पहुंच गया।

कप्तान ने कमरुज्जमां को ले आने का पैगाम महल में भिजवाया। यह खबर मिलते ही पुरुष के रूप में बदौरा वहां पहुंच गई। उसने जैसे ही कमरुज्जमां को देखा वह खुश हो गई, लेकिन उसने खुद को संभाला और जहाज के कप्तान को खूब सारा इनाम देकर सभी व्यापारियों के साथ विदा किया।

कमरुज्जमां ने अपनी पत्नी को पुरुष रूप में नहीं पहचाना। बदौरा उसे अपने साथ महल में ले गई और सेवकों से कहकर उसे अच्छे कपड़े और खाने को शानदार भोजन दिलवाया। फिर बदौरा अपने स्त्री रूप में सजकर कमरुज्जमां के पास आई। अब कमरुज्जमां ने फौरन बदौर को पहचान लिया। उसकी आंखों से खुशी के कारण आंसू निकलने लगे। उसके बाद बदौरा ने अपना सारा हाल शहजादे को सुनाया और कमरुज्जमां ने भी अपने अब तक के सफर के बारे में बदौरा को जानकारी दी।

अगले दिन सुबह होते ही स्त्री रूप में बदौरा अवौनी देश के बादशाह अश्शम्स के पास गई। उसे बादशाह ने पहचाना नहीं। तभी बदौरा ने बादशाह को अपने पुरुष रूप और जंगल में पति के खोने की सारी कहानी सुनाई। बदौरा ने कहा कि आप मुझे चाहें, तो मृत्यु दंड दे सकते हैं। बस मेरा इरादा किसी को दुख पहुंचाने का नहीं था। मैंने सब कुछ विवश होकर किया। अब मुझे अपने पति मिल गए हैं, इसलिए मैंने आपको सब सच बता दिया है। आप अपनी बेटी की शादी मेरे पति से करवा सकते हैं। मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी।

तभी कमरुज्जमां को बदौरा ने अवौनी देश के बादशाह अश्शम्स से मिलवाया। बादशाह भी सारी बात सुनकर अपनी बेटी की शादी कमरुज्जमां से करवाने के लिए राजी हो गए। बादशाह ने शादी की तारीख तय करने से पहले कमरुज्जमां से इसके बारे में पूछा। शहजादे ने कहा कि मेरा मन तो है कि मैं वापस अपने घर चला जाऊं। लेकिन, आप और मेरी पत्नी अगर चाहते हैं कि मैं विवाह करूं, तो मैं ऐसा ही करूंगा। फिर धूमधाम से बादशाह अश्शम्स ने अपनी बेटी और शहजादे कमरुज्जमां की शादी करवा दी।

थोड़े समय में दोनों के एक-एक पुत्र हो गए। दोनों को उनकी मां बहुत प्यार करती थी, लेकिन बेटे अपनी सौतेली मां को अधिक प्यार करते थे। इससे जलकर दोनों मांओं ने एक दूसरे को बदनाम करने की साजिश की। जब बेटों को यह पता चला, तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। उन्होंने कहा कि वो पिता को सब कुछ बता देंगे। इससे परेशान होकर कमरुज्जमां की दोनों पत्नियों ने एक-दूसरे के बेटे के खिलाफ कमरुज्जमां से शिकायत करते हुए कहा कि आपके बेटों ने हमें बदनाम करने की कोशिश की है।

इस पर बिना सच्चाई जाने कमरुज्जमां ने दोनों बेटों अमजद और असद को मौत की सजा देने का ऐलान कर दिया। आदेश मिलते ही मंत्री शहजादों को जंगल ले गया और उन्हें बताया कि आप दोनों को मौत की जा दी गई है। दोनों भाइयों ने कहा कि जब पिता ने ऐसा कहा है, तो सोच समझकर ही कहा होगा। हमें सजा मंजूर है।

यह सुनकर मंत्री ने दोनों के हाथों को बांध दिया और अपनी तलवार निकाल ली। तलवार की चमक देखकर पास ही खड़ा घोड़ा हिनहिनाने लगा और तेजी से दूसरी दिशा में भागने लगा। मंत्री को लगा कि ये दोनों यही बंधे हैं, तो क्यों न पहले घोड़े को देख लूं। वह घोड़े के पीछे दौड़े और उनके सामने एक शेर आ गया। अमजद और असद दोनों दूर से यह सब देख रहे थे। उन्होंने जल्दी से रस्सी तोड़ी और असद ने मंत्री को शेर से बचा लिया व अमजद ने घोड़े को पकड़ लिया।


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