Alif Laila Story - ( Part - 6 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी ( 5036 )

Alif Laila Story - ( Part - 6 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी

Alif Laila Story - ( Part - 6 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
Alif Laila Story - ( Part - 6 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी


अवौनी देश के बादशाह अश्शम्स ने बदौरा को कमरुज्जमां समझकर अपने महल चलने के लिए कहा। वहां बदौर की बुद्धि और सबके लिए आदर भाव देखकर बादशाह ने अपनी बेटी की शादी का प्रस्ताव कमरुज्जमां बनी बदौरा के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा नहीं है, इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम यहां का राजपाट संभालते हुए यही रहो। बदौरा बादशाह को मना नहीं कर पाई और अपनी जान के डर से सच भी न बता सकी। उसने डर के मारे बादशाह की बेटी से शादी कर ली।

विवाह की पहली रात ही बदौरा ने अवौनी देश के बादशाह अश्शम्स की बेटी को सब सच बता दिया। उसके बाद पुरुष के भेष में बदौरा ने कहा कि अब तुम चाहे, तो मुझे प्राण दंड दिलवा दो या छोड़ दो। सबकुछ तुम पर निर्भर करता है, लेकिन मैं तुम्हें बता दूं कि जब कभी भी मेरे पति लौटेंगे मैं तुम्हारा विवाह उनसे करवा दूंगी। फिर हम तीनों खुशी-खुशी रहेंगे। बादशाह अश्शम्स की बेटी ने उसे तुरंत गले से लगा लिया और कहा कि मैं आपके सहास की तारीफ करती हूं। आप यहां आराम से रहिए और हमारी सेना कि मदद से अपने पति को ढूंढती रहिए, मैं किसी से कुछ भी नहीं कहूंगी।

वहां कमरुज्जमां अपनी पत्नी बदौरा की याद में तड़प रहा था। इंतजार करते-करते वो दिन आ ही गया जब जहाज वहां से अवौनी राज्य के लिए रवाना होने वाला था। उसी दिन एक पक्षी ने कुछ सुनहरी सी चीज उस बगीचे में गिरा दी। जब कमरुज्जमां ने देखा, तो पता चला कि वो वही यंत्र है, जिसका पीछा करते-करते वो रास्ता भटक गया था। कमरुज्जमां बहुत खुश हुआ। उसने उस यंत्र को एक मटके में डाल दिया और माली ने उसे करीब 10-20 मटके में जैतून का तेल भरकर तोहफे के रूप दे दिया। तभी जहाज को चलाने वाला व्यक्ति माली के घर आया और कहा कि जिसे भी जहाज से जाना है जल्दी चले आना, क्योंकि हम कुछ देर में चले जाएंगे। इतने में कमरुज्जमां ने कहा कि मुझे जाना है। मैं कुछ देर में आ जाऊंगा, लेकिन तबतक आप मेरे मटके लेकर जहाज में रख दीजिए। जहाज के कप्तान ने सारे मटके जहाज पर रखवा दिए।

तभी अचानक माली की तबीयत खराब हो गई और कमरुज्जमां जहाज वक्त पर जहाज पर नहीं पहुंच पाया। जब वो समुद्र किनारे पहुंचा, तो देखा कि जहाज निकल गया था। वो बहुत दुखी हो गया। दुखी होकर वो माली के पास वापस आया, तो देखा कि माली मर चुका था। उसने माली को अंतिम विदाई दी और जहाज के वापस आने का इंतजार वही बगीचे में बैठकर करने लगा। अब शहजादा माली की जगह पर रोज बगीचे की देखभाल करता और रात को बदौरा को याद करके सो जाता।

जब जहाज अवौनी के तट पर पहुंचा, तब वहां कमरुज्जमां के भेष में बदौरा उसी जहाज के पास पहुंच मौजूद थी। उसने जहाज चलाने वाले और उसमें मौजूद व्यापारियों से कहा, “इसमें जितना भी जैतून का तेल है, वो मुझे दे दो।”  कमरुज्जमां के कहे अनुसार सभी ने अपने-अपने जैतून के तेल के मटके उसे बेंच दिए। तभी बदौरा की नजर उन मटकों पर पड़ी जिसे कमरुज्जमां ने जहाज पर रखवाया था। बदौर ने पूछा कि ये मटके किसके हैं? इनमें क्या है? तब जहाज के कप्तान ने बताया कि यह एक छोटे व्यापारी के मटके हैं, जिसका जहाज छूट गया था। इसमें भी जैतून का तेल है। बदौरा ने उन मटको को भी खरीद लिया और उससे कहा कि इसके पैसा ले जाकर उस मुसाफिर को देना।

फिर बदौरा सारे मटके लेकर महल चली गई। कमरुज्जमां ने पहचान के लिए उस मटके को अलग से सजा रखा था, जिसमें बदौरा का यंत्र था। सभी मटके में से उसे सबके अलग देखकर पुरुष के भेष में रह रही बदौरा ने उसे खोलकर देखा तो उसमें उसे अपना यंत्र मिला। अपने खोए यंत्र को देखखर बदौरा बहुत खुश हुई। अगले ही दिन वह सीधे उस जहाज को चलाने वाले व्यक्ति के पास पहुंची और कहा कि जल्दी से उस मुसाफिर को मेरे पास लेकर आओ, जिसके मटके तुम्हारे जहाज पर थे। हमें पता चला है कि उसने हमारे राज्य का काफी सारा कर्ज ले रखा है। अगर तुम उसे यहां नहीं लाए, तो मैं तुम सबको बंदी बना लूंगा।

इतना कहकर उसने मंत्री होने के नाते जहाज का सारा सामान जब्त कर लिया और व्यापारियों को अपने पास रख लिया। उसने कहा तुम जल्दी से लौटकर आओ और सारा सामान व व्यापारियों को लेकर चले जाओ। जहाज का कप्तान मजबूर होकर वापस उसी देश चला गया जहां से आया था। कुछ ही दिन में वहां पहुंचकर वो सीधे बगीचे गया और दरवाजा खटखटाने लगा। कमरुज्जमां गहरी नींद में सो रहा था। उसने काफी देर बाद दरवाजा खोला।


Shake Effect

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