Alif Laila Story - ( Part - 5 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 5 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी |
तब बादशाह ने शर्त के अनुसार, अपनी बेटी की शादी कमरुज्जमां से करवा दी। शादी के बाद बादशाह ने अपने दामाद को अपने महल में एक ऊंचा पद दे दिया। कुछ दिन खुशी-खुशी रहने के बाद कमरुज्जमां उदास हो गया। जब बदौरा ने उससे दुख का कारण पूछा, तो उसने कहा कि वो पिता की याद में दुखी है। इतना सुनते ही बदौरा ने अपने पिता से साल भर के लिए राज्य से दूर घूमने जाने के लिए अनुमति मांगी।
बादशाह गोर ने भी खुशी-खुशी उन्हें जाने की इजाजत देते हुए जल्दी लौटकर आने को कहा। पिता से इजाजत मिलने के बाद बदौरा अपने पति और सेवकों के साथ निकल पड़ी। उसने कमरुज्जमां से कहा कि आप अब ज्यादा दुखी न हों। यहां से हम आपके पिता से मिलने जाएंगे। शहजादा कमरुज्जमां खुश हो गया। दोनों कुछ दूर आगे बड़े ही थे कि शहजादे की नजर बदौरा की कमर पर पड़ी। उसमें एक लाल रंग की पेटी बंधी हुई थी। कमरुज्जमां उससे लाल रंग की पेटी के बारे में पूछने ही वाले थे कि तबतक बदौरा ने उस पेटी को कमर से उतरकर जमीन में रख दिया और सो गईं।
शहजादा भी बदौरा के पास लेट गया और कुछ देर तक उस पेटी को देखता रहा। फिर शहजादे ने उस लाल पेटी को खोलकर देखा। पेटी को खोलने के बाद शहजादे को उसमें एक लाल रंग का बड़ा सा रत्न मिला, जो बहुत ही खूबसूरत था। उस रत्न पर छोटे अक्षरों में कुछ लिखा हुआ था। कमरुज्जमां उसे खोलकर देख ही रहे थे कि तब तक कही से एक बड़ा पक्षी आया और उस रत्न को लेकर उड़ गया। काफी देर तक शहजादे ने उस पक्षी का पीछा किया, लेकिन वो पक्षी पकड़ में न आया।
थक हारकर शहजादा एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उसी पेड़ के पास वो पक्षी भी आ गया। उसे देखकर कमरुज्जमां फिर दौड़कर उसका पीछा करने लगा। भागते-भागते कमरुज्जमां किसी अनजान राजा के नगर में पहुंच गया। वहां कोई भी उससे बात नहीं कर रहा था। उसने कुछ दूर में एक बगीचा देखा। कमरुज्जमां को भूख लगी थी, वो दौड़कर बाग के अंदर जाने लगा। अनजान व्यक्ति को बगीचे की ओर तेजी से आते देख बगीचे के माली ने बाग का गेट बंद कर दिया।
माली ने कहा, “तुम इस राज्य के नहीं लगते हो। राज्य तो छोड़ों तुम इस देश के भी नहीं लगते हो। यहां परदेसियों को देखते ही मार दिया जाता है। जल्दी से यहां से भाग जाओ।” इतना सुनकर कमरुज्जमां ने अपना पूरा हाल सुना दिया और कहा कि मैं भटकर यहां पहुंच गया हूं। आप मुझे अपने देश जाने की दिशा दिखाएं। माली को उस पर तरस आ गया। उसने कहा कि तुम यहां रहकर कुछ खा लो और आराम कर लो, लेकिन यहां तुम्हें सबसे छिपकर रहना होगा। माली ने आगे कहा कि तुम जिस द्वीप से आए हो, वो करीब एक साल की दूरी पर है। वहां जाने के लिए हर साल एक जहाज जाता है। मैं तुम्हें उसमें बैठा दूंगा। तब तक तुम यहां आराम से रह सकते हो।
कमरुज्जमां ने ठीक वैसा ही किया। उधर कमरुज्जमां की पत्नी बदौरा की जब नींद खुली, तो वो अपने बगल में पति को न पाकर परेशान हो गई। उसने बगल में अपनी कमर की लाल रंग की पेटी को खुला देखा। वो समझ गई कि इसे उसके पति ने ही खोला होगा, लेकिन उसके अंदर का रत्न गायब था। असर में वह एक यंत्र था, जिसे बदौरा की मां ने उसकी हिफाजत के लिए उसे दिया था। उसे लगा कि शहजादा उस यंत्र की वजह से ही कही चला गया है या फिर किसी मुश्किल में पड़ गया है। उसने एक दो-दिन तक कमरुज्जमां का इंतजार उसी जगह पर किया, लेकिन जब वो नहीं लौटा तो बदौरा और परेशान हो गई।
बदौरा ने तय किया कि वो राजा के भेष में आगे की यात्रा करेगी, ताकि उन्हें कमजोर समझकर उन पर कोई हमला न कर दे। उसने अपनी जगह पालकी में एक दासी को बैठा दिया और खुद शहजादे के कपड़े पहनकर उसकी पालकी में बैठ गई। सभी आगे बढ़ते हुए अवौनी देश पहुंच गए। वहां के बादशाह अश्शम्स को जब पता चला कि कमरुज्जमां की पालकी पास से जा रही है, तो वो उनसे मिलने आ गया। उन्होंने कमरुज्जमां को कभी देखा नहीं था, तो उसकी पत्नी बदौरा को पुरुष भेष में देखकर कमरुज्जमां समझ लिया।
