Alif Laila Story - ( Part - 8 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी ( 5038 )

Alif Laila Story - ( Part - 8 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी

Alif Laila Story - ( Part - 8 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
Alif Laila Story - ( Part - 8 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी


फिर असद और अमजद ने मंत्री को कहा कि अब हमें बांधकर मौत की सजा दे दीजिए। इस पर मंत्री ने रोते हुए कहा कि आप दोनों ने मेरी जान बचाई, तो मैं आप लोगों को कैसे मार सकता हूं। आप दोनों यहां से किसी दूसरे देश चले जाइए। मैं आपके कुछ कपड़ों को शेर के खून से लतपत करके बादशाह को दिखा दूंगा। दोनों भाइयों ने ऐसा ही किया और जंगल में भटकते-भटकते नदी के रास्ते से एक नए देश में पहुंच गए।

वहीं मंत्री भी शेर के खून में लतपत कपड़े लेकर बादशाह के पास पहुंचा। अपने बच्चों के मरने की खबर सुनकर बादशाह दुखी हो गया। तभी उन्हें पता चला कि उसकी दोनों पत्नियों ने ही एक दूसरे को बदनाम करने के लिए पत्र लिखा था और फिर इल्जाम उसके बेटों पर लगा दिया। इस बात पर बादशाह को बहुत गुस्सा आया और उसने अपनी दोनों पत्नियों को जेल में डाल दिया।

उधर नए देश पहुंचे असद और अमजद ने यह तय किया कि पहले एक व्यक्ति आगे जाकर किसी से मदद मांगेगा। फिर दूसरा उसके बुलावे पर ही आगे आएगा। यह तय करके असद आगे को बढ़ा। तभी उसे एक बूढ़े ने अपनी बातों में फंसाकर बंदी बना लिया, क्योंकि उसे बलि के लिए एक आदमी चाहिए था। रोज दो लड़कियां जेल में जाकर असद उसकी पिटाई करती और खाने के लिए दिनभर में सिर्फ दो रोटी देतीं।

असद का पूरे एक दिन इंतजार करने के बाद अमजद आगे बढ़ा। उसे लगा कि उसका भाई मुसीबत में है। उसने एक दर्जी से पूछा कि क्या आपने मेरे भाई को यहां देखा है, वो मेरे जैसे ही कपड़ों में कल इधर आया होगा। दर्जी ने कहा कि हो सकता है कि तुम्हारा भाई उस बुढ़े के हाथ लग गया हो। वो सभी परदेसियों को अपनी बातों में फंसाकर बलि चढ़ाने के लिए ले जाता है।

अमजद ने फिर उससे पूछा कि यहां से अवौनी राज्य कितना दूर है। उन्होंने कहा करीब पांच महीने लग सकते हैं। यह सोचते हुए अमजद आगे जा रहा था कि उस नगर के बादशाह के सैनिकों ने उसे पकड़ लिया। बादशाह ने अमजद से पूछा कि वो इस राज्य में कैसे पहुंचा। उसने बादशाह को अपनी पूरी कहानी सुना दी। उसकी कहानी सुनकर बादशाह बहुत प्रभावित हुए और कहा कि तुम्हें तुम्हारे पिता ने ही मरवाने के आदेश दिए। अब हम तुम्हें यहां अपना बेटा बनाकर रखेंगे और तुम्हारे भाई को ढूंढने में भी मदद करेंगे।

बादशाह ने अमजद को अपना बेटा मानने के बाद उसे मंत्री पद दे दिया और सारी जगह एलान करवा दिया कि जो भी असद के बारे में बताएगा, उसे खूब सारा इनाम दिया जाएगा। कई सारे जासूस और सैनिक भेजकर असद को ढूंढने की कोशिश की गई, लेकिन असद का कोई पता नहीं चल पाया। असद रोज उन दो लड़कियों की मार खाता और रोते हुए सो जाता। धीरे-धीरे उसके बलि चढ़ाने का दिन भी नजदीक आ गया।

असद को बलि चढ़ाने के लिए एक जहाज में बैठा दिया। उस जहाज की जांच करने के लिए बादशाह के कुछ सैनिक भी पहुंचे, लेकिन असद को उन्होंने संदूक में छुपा रखा था। वो किसी भी सैनिक को नहीं दिखा । सैनिकों के जाते ही उन लोगों ने असद को संदूक से बाहर निकालकर उसके पैरों को बांध दिया।

तभी अचानक उल्टी दिशा में हवा होने के कारण जहाज कवाला राज्य की जगह एक ऐसे राज्य में पहुंच गया जहां मरजीना नाम की रानी का राज्य था। रानी मरजीना उस वक्त समुद्र के किनारे ही थी। जहाज को  अपने राज्य के समीप देखकर वह खुद जहाज के पास पहुंच गई। असद के पैर में बेड़ियां और उसकी खराब हालत को देखकर मरजीना को बहुत गुस्सा आया। उसने सबसे कहा कि तुम दुश्मन देश के लोग हो। मैं चाहूं, तो तुम सबको मार दूं। लेकिन, मैं ऐसा करूंगी नहीं। तुमने जिसे इस तरह बांधकर रखा है उसे छोड़कर मेरे हवाले कर दो और फौरन यहां से भाग जाओ।


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