Alif Laila Story - ( Part - 9 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 9 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी |
उसके बाद रानी मरजीना ने असद को अच्छे कपड़े और खाना दिया। उसके बाद कुछ देर असद के साथ मरजीना बाग में घूमने लगी। फिर असद ने उसे अपनी पूरी कहानी सुनाई। यह सब सुनकर मरजीना को काफी दुख हुआ। उसने अपने राजमहल का पैसों संबंधी कामकाज देखने के लिए असद को रखने का फैसला किया। फिर दोनों ने कुछ देर बात की और मरजीना अपने महल में चली गई, लेकिन असद वही बाग में ही सो गया।
असद को बलि चढ़ाने के लिए ले जा रहा बहराम चुपके से मरजीना के बाग में पीने लायक पानी लेने के लिए आया। तभी उसने असद को भी वहां देखा, तो पानी और असद दोनों को लेकर वह चला गया। सुबह होने से पहले ही बहराम जहाज लेकर भाग गया। सुबह जब मरजीना को असद कहीं नहीं दिखा, तो वह परेशान हो गई। काफी देर तक उसने असद के न मिलने पर मरजीना को बहराम पर शक हुआ।
रानी मरजीना ने तुरंत अपने सारे जहाज निकलवाए और बहराम के देश की ओर बढ़ने लगी। कुछ घंटों में ही मरजीना के सभी जहाजों ने बहराम के जहाज को घेर लिया। मरजीना को वहां देखकर बहराम ने असद को समुद्र में फेंक दिया। असद को अच्छे से तैरना आता था, वो तैरते हुए किनारे पर पहुंच गया और एक मस्जिद में जाकर सो गया। उधर मरजीना ने उनका जहाज किनारे में उताकर पूरी तलाशी ली, लेकिन असद मिला नहीं।
बहराम ने जहाज से उतकर जैसे ही नगर की ओर देखा, तो उसे पता लगा कि यह उसी का शहर है। फिर बहराम छुपते-छुपाते उसी मस्जिद में पहुंच गया, जहां असद को सो रहा था। उसने असद को देखकर उसे फिर उसी जेल में पहुंचा दिया जहां से उसे लाया था। बहराम ने कहा कि असद तुम इस साल बलि से बच गए, लेकिन अगले साल नहीं बच पाओगे।
दोबारा उस जेल में उन लड़कियों में से एक लड़की बोस्तान आई, जो रोज असद को मारती थी। उसे देखकर असद ने कहा कि इससे तो अच्छा होता कि मेरी बलि ही चढ़ जाती। उस लड़की ने कहा कि मैं तुम्हें आज से नहीं मारूंगी। मुझे समझ आ गया है कि तुम्हें इस तरह से रोज मारना और दुखी करना गलत है। फिर असद ने कहा कि भले ही तुम न मारो, लेकिन वो दूसरी लड़की तो मुझे जरूर मरेगी। तब बोस्तान ने कहा कि आज के बाद से सिर्फ मैं ही इस जेल में आऊंगी और तुम्हें बिना मारे अच्छी-अच्छी चीजें खाने के लिए दूंगी।
कुछ दिनों के बाद बोस्तान के कानों तक वह एलान पहुंचा कि जो भी अमजद के भाई असद को ढूंढकर लाएगा उसे खूब पैसा मिलेगा। अगर किसी के घर में असद मिला, तो उसका घर खुदवा कर सभी को प्राण दंड दिया जाएगा। यह बात सुनते ही किसी तरह से बोस्तान ने असद को जेल से बाहर निकाला और वहां लेकर गई जहां से एलान की आवाज आ रही थी।
सेवकों ने असद के मिलने की जानकारी सीधे मंत्री अमजद को दी। वह सीधे असद के पास पहुंचा और उसे गले से लगा लिया। उसके बाद वो असद और बोस्तान को बादशाह के पास लेकर चला गया। बादशाह ने वादे के अनुसार उन्हें खूब सारा पैसा दिया और जिसने असद को बंद करके रखा था, उसके घर को खुदवा दिया।
साथ ही वहां मौजूद सभी लोगों को पकड़कर बादशाह के पास लाया गया। उस जहाज के कप्तान बहराम ने बादशाह से दया की भीख मांगते हुए कहा कि मैंने तो जैसा मालिक ने बताया वैसा ही किया। आप मुझे छोड़ दीजिए। बादशाह ने सिर्फ उसके मालिक और परिवार वालों को दंड दिया और बाकी सबको खर्चे के पैसे देकर छोड़ दिया।
सजा न मिलने पर बहराम ने अजमद और असद से कहा कि मुझे अभी पता चला है कि आप बादशाह कमरुज्जमां के बेटे हैं। मैं कुछ समय पहले आपके राज्य गया था। मुझे वहां पता चला कि आपके पिता आप दोनों की याद में बहुत रो रहे हैं। उन्हें आपकी माताओं की साजिश के बारे में पता चल गया था और उन्हें अपनी करनी पर पछतावा है। उन्हें उनके मंत्री ने भी बता दिया था कि आपको उसने प्राणदंड नहीं दिया है। तब से वो आप दोनों को ढूंढ रहे हैं।
