Alif Laila Story - ( Part - 10 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 10 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी |
बहराम ने आगे कहा कि मेरे पास जहाज हैं। आप चाहें, तो मैं आप दोनों को वहां पहुंचा सकता हूं। इस बात को सुनकर दोनों भाई खुश हो गए और बादशाह से अपने घर जाने की आज्ञा मांगी। तभी सामने से एक बड़ी सी सेना के आने की खबर बादशाह को मिली। उन्होंने तुरंत अमजद को जाकर देखने के लिए कहा कि पता करो, किस दुश्मन ने हम पर हमला किया है।
वहां पहुंचकर अमजद को पता चला कि जहाज में एक महिला बड़ी सी सेना के साथ आ रही है। अमजद ने उस महिला से सेना के साथ आने का कारण पूछा, तो महिला ने बताया कि मैं मरजीना हूं। बहराम नाम का कप्तान मेरे पास से असद को लेकर भाग आया है। उसे मैंने अपने महल में काम पर रखा था।
अमजद ने मुस्कुराते हुए कहा कि असद मेरा छोटा भाई है। आप उससे यहीं मिल सकती हैं। हम उसे बचाकर ले आए हैं। यह सुनकर मरजीना बहुत खुश हुई और सेना को पीछे उसका इंतजार करने के लिए कहकर आगे की ओर बढ़ गई। अमजद ने उसे बादशाह और असद से मिलवाया।
इतने में एक और सेना उस राज्य की तरफ आने की खबर मिली। दोबारा अमजद उनसे आने का कारण पूछने के लिए गया। इस बार पता चला कि चीन से बादशाह गोर अपनी बेटी बदौरा और दामाद को ढूंढते हुए वहां पहुंचे हैं। अमजद को जैसे ही उनके बारे में पता चला, तो उसने तुरंत उनको आदाब करते हुए कहा कि मैं बदौरा और कमरुज्जमां का बेटा यानी आपका नाती हूं। अभी मेरे पिता अवौनी में खुशी-खुशी मां के साथ रह रहे हैं। इतना सुनते ही बादशाह गोर ने अपने नाती को गले से लगा लिया। अमजद उन्हें भी बादशाह के पास ले गया और असद से परिचय करवाया।
अभी सब लोग आपस में बात कर ही रहे थे कि अचानक एक और बड़ी सी सेना की उस राज्य की ओर आने की खबर मिली। बादशाह ने अमजद से कहा, “जरा जाकर देखो कि यह तीसरी सेना किसकी आ रही है।” अमजद ने जाकर पूछताछ की, तो पता चला कि उसके पिता कमरुज्जमां वहां अपनी सेना के साथ अपने बेटों की तलाश में आए हैं। यह देखकर अमजद जल्दी से अपने पिता के गले लग गया। वह उन्हें जल्दी महल में ले गया और तीनों बाप बेटे गले लगे। फिर कमरुज्जमां ने अपने ससुर यानी चीन के बादशाह गोर को भी वहां देखा और खुशी से उन्हें आदाब कहा।
अब कमरुज्जमां, उसके दोनों बेटे, उनके ससुर, मरजीना उस राज्य के बादशाह के साथ बैठकर बातें कर रहे थे। उसी वक्त चौथी सेना की टुकड़ी की उनके राज्य की ओर आने की खबर आई। बादशाह ने कहा, “आज तो हमारे राज्य में चारों तरफ से सेनाएं आ रही हैं। देखो अब कहीं सच में कोई दुश्मन तो नहीं आ गया है।”
अमजद एक बार फिर सेना के बारे में जानने के लिए पहुंच गया। तब उसे सेनापति ने बताया कि कमरुज्जमां के पिता सालों से अपने बेटे की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। वो अपनी सेना के साथ अपने बेटे के बारे में जानने के लिए खलदान से आए हैं। अगर आपको कमरुज्जमां के बारे में कुछ पता हो, तो बता दीजिए।
अमजद ने हंसते हुए कहा कि खलदान के बादशाह को आप यहां बुला लीजिए। अब जिन्हें आप ढूंढ रहे हैं, उन्हें और खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वो यहीं इसी राज्य में कुछ ही दूरी पर हैं। कमरुज्जमां के पिता को जैसे ही यह समाचार मिला वो खुशी के मारे रोने लगे। वो दौड़ते हुए अमजद के साथ आगे बढ़े।
अमजद उन्हें सीधे वहां ले गया, जहां सब एक साथ बैठे थे। अपने बेटे कमरुज्जमां को देखते ही बादशाह शाहजमां ने उसे गले से लगा लिया। अपने बेटे से शाहजमां ने कहा कि ऐसा क्या हो गया कि तुम आज तक मेरे पास लौटकर नहीं आए। मैंने तुम्हें कितना ढूंढा। इतना कहकर वो रोने लगे। उसके बाद कमरुज्जमां ने अपने पिता से असद और अमजद की पहचान करवाई। उसके बाद चीन से आए बादशाह गोर से भी मुलाकात करवाई। खलदान के बादशाह शाहजमां सबसे मिलकर काफी खुश हुए।
उसके बाद कमरुज्जमां ने अपने पिता को अब तक का सारा किस्सा सुनाया। फिर सभी ने सलाह-मशवरा करके असद का विवाह मरजीना से और अमजद का विवाह असद की जान बचाने वाली लड़की बोस्तान से करने का फैसला लिया। दोनों का धूमधाम से विवाह हुआ और कई दिनों तक जश्न चला। फिर चीन से आए बादशाह गोर, खलदान के बादशाह शाहजमां और उनका बेटा कमरुज्जमां सभी अपने-अपने देश लौट गए।
इतनी कहानी सुनाकर शहरजाद ने शहरयार से कहा कि मुझे उम्मीद है कि आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी। मेरे पास ऐसी ही कई सारी कहानियां हैं। अगर मुझे प्राणदंड नहीं दिया जाएगा, तो मैं कल दोबारा से एक नई और इससे भी रोमांचित कहानी सुनाऊंगी। यह कहानी नूरुद्दीन और फारस देश की दासी की है। नई कहानी सुनने की चाह रखते हुए बादशाह शहरयार ने एक और दिन के लिए प्राणदंड रोक दिया और अगले दिन शहरजाद से कहानी सुनाने के लिए दोबारा आने की बात कही।
