Alif Laila Story - ( Part - 1 ) दरियाबार की शहजादी की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 1 ) दरियाबार की शहजादी की कहानी |
शहजादी ने जैनुस्सनम और हैरन के 49 शहजादों को कहानी सुनाना शुरू किया। उसने बताया कि मैं काहिरा के पास के द्वीप दरियाबार के बादशाह की बेटी हूं। मेरे अब्बा ने सालों दुआ की थी, जिसके बाद मैं पैदा हुई। मुझे उन्होंने राजनीति, घुड़सवारी और राज्य को चलाने के लिए जरूरी अन्य सभी कौशल की विद्या दी। उनकी इच्छा थी कि उनके बाद मैं ही दरियाबार के सभी कामकाज देखूं।
शहजादी ने आगे कहा कि एक दिन मेरे अब्बा शिकार खेलने के लिए जंगल गए। जाते-जाते वो घने जंगल में पहुंच गए। वहां जाकर उन्होंने एक बड़े शरीर वाले आदमी को देखा, जिसके पास एक महिला और छोटा बच्चा बैठे रो रहे थे। वो आदमी खूब सारा खाना खाने के बाद उस महिला पर विवाह करने का दवाब डालने लगा। वो लड़की नहीं मानी, तो वो उसपर नाराज हुआ। मेरे पिता दूर से वो सब देख रहे थे। उन्होंने जैसे ही देखा कि वो आदमी उस लड़की पर हाथ उठाने वाला है, तो उन्होंने अपनी कमान से तीर छोड़ दिया, जो सीधे उस आदमी के सीने पर जाकर लगा। उसी वक्त राक्षस की मौत हो गई।
मेरे पिता ने उस महिला से उसकी कहानी पूछी। उस लड़की ने बताया कि वो पास के ही सरासंग कबीला के मुखिया की बेटी है और जिसे तुमने मारा है वो हमारे घर में ही काम किया करता था। उसकी नजर मुझ पर बहुत पहले से थी। एक दिन मौका पाकर वो मुझे और मेरे बेटे को इस जंगल में ले आया और शादी करने के लिए जोर डालने लगा। अब मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं अपने घर वापस जाकर क्या कहूंगी।
शहजादी ने कहा कि उस लड़की की बात सुनते ही मेरे पिता उसे अपने साथ अपने महल ले आए। उन्होंने उस महिला और उसके बेटा का काफी ख्याल रखा। जैसे ही उस महिला का बेटा बड़ा हो गया, तो सभी ने मेरी और उस लड़के की शादी की बात शुरू कर दी। वो लड़का बलवान और बुद्धिमान था, इसलिए मेरे अब्बा ने हमारा निकाह तय कर दिया।
उसके बाद उन्होंने शादी से कुछ दिन पहले ही उस लड़के से कहा कि तुम मेरी बेटी से निकाह करने वाले हो। मैं शादी के बाद तुम्हें यहां का बादशाह बना दूंगा। यह सुनकर वो लड़का बहुत खुश हुआ। तभी दरियाबार के बादशाह ने कहा कि बस मेरी एक शर्त है।
उस लड़के ने मेरे अब्बा से पूछा कि आखिर वो शर्त क्या है? तब मेरे पिता जी ने कहा कि तुम मेरी बेटी से निकाह करने के बाद किसी दूसरी लड़की से शादी नहीं करोगे। अगर तुम ये वादा करोगे, तो ही मैं तुम्हारा निकाह अपनी बेटी से कराऊंगा। यह सुनते ही उस लड़के को गुस्सा आ गया। उसने कहा कि वो होने वाला बादशाह है और बादशाहों की कई पत्नियां होती हैं।
इतना सुनते ही बादशाह ने वो निकाह तोड़ दिया। इससे उस लड़के को इतना गुस्सा आया कि उसने मेरे पिता को जान से मार दिया। फिर वो मुझे मारने के लिए ढूंढने लगा। तभी मंत्री ने मुझे एक गुप्त रास्ता दिखाकर वहां से भागने के लिए कहा।
मैंने भी ठीक वैसा ही किया। मैं भागकर एक जहाज में बैठ गई। तभी नदी में इतना तेज तूफान आया कि जहाज डूब गया। किसी तरह से मैं बचकर नदी के किनारे पहुंच गई। वो एक सुनसान जगह थी। वहां दूर-दूर तक कोई भी नहीं था। मैं जोर-जोर से रोने लगी। एक दिन बाद वहां कुछ लोग आए, उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा, लेकिन डर कर मैं और ज्यादा रोने लगी। उसके बाद एक घोड़े में एक लड़का आया और मुझसे फिर सवाल करने लगे। उसने मुझसे कहा कि वो शहजादा है और वो मेरी मदद करना चाहता है। मैंने उसपर भरोसा करके उसे सब कुछ बता दिया।
तब वो तुरंत मुझे अपने घर ले गया और अपने परिवार से मिलवाया। कुछ समय बाद उस लड़के के घरवालों ने मेरी और उस लड़के की शादी करवा दी। शादी के पहले दिन ही उसके राज्य में दुश्मनों ने हमला कर दिया। कुछ ही देर में उन्होंने उस राज्य के सभी लोगों को मार दिया। किसी तरह मैं और मेरा पति वहां से भाग गए।
हमें पास की ही नदी में एक नाव दिखी। हम तुरंत उस पर बैठ गए। हवा का रूख उलटा और तेज था, इसलिए हमारी नाव किसी गलत दिशा की ओर चली गई। तभी सामने से एक बड़ा सा जहाज आ रहा था। हमने उनसे मदद मांगी। बाद में पता चला कि उसमें डाकू बैठे थे।
उन्होंने हम दोनों को कैदी बना लिया। वो सात डाकू थे। सभी चाहते थे कि मैं उनकी सेविका बन जाऊं। इसी वजह से सभी आपस में लड़ने लगे। अंत में एक डाकू ने सबको मार दिया और मुझसे कहा कि मैं तुम्हें अपनी सेविका नहीं बनाना चाहता, लेकिन मेरे मालिक को सेविका चाहिए। मैं उनको तुम्हें सौंप दूंगा। उसने मुझसे पूछा कि ये आदमी कौन है, तो मैंने बताया कि वो मेरे पति हैं। यह सुनते ही उस डाकू ने मेरे पति को जहाज से नीचे फेंक दिया।
