TOP 3 Short Story In Hindi ( 5019 )

TOP 3 Short Story In Hindi

Short Story In Hindi
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Short Story In Hindi - लालची आदमी की कहानी


एक नगर में एक लालची आदमी  रहता था. अपार धन-संपदा होने के बाद भी उसे हर समय और अधिक धन प्राप्ति की लालसा रहती थी.

एक बार नगर में एक चमत्कारी संत का आगमन हुआ. लोभी व्यक्ति को जब उनके चमत्कारों के बारे में ज्ञात हुआ, तो वह दौड़ा-दौड़ा उनके पास गया और उन्हें अपने घर आमंत्रित कर उनकी अच्छी सेवा-सुश्रुषा की. सेवा से प्रसन्न होकर नगर से प्रस्थान करने के पूर्व संत ने उसे चार दीपक दिए.

चारों दीपक देकर संत ने उसे बताया, “पुत्र! जब भी तुम्हें धन की आवश्यकता हो, तो पहला दीपक जला लेना और पूर्व दिशा में चलते जाना. जहाँ दीपक बुझ जाये, उस जगह की जमीन खोद लेना. वहाँ तुम्हें धन की प्राप्ति होगी. उसके उपरांत पुनः तुम्हें धन की आवश्यकता हुई, तो दूसरा दीपक जला लेना. जिसे लेकर पश्चिम दिशा में तब तक चलते जाना, जब तक वह बुझ ना जाये. उस स्थान से जमीन में गड़ी अपार धन-संपदा तुम्हें प्राप्त होगा. धन की तुम्हारी आवश्यकता तब भी पूरी ना हो, तो तीसरा दीपक जलाकर दक्षिण दिशा में चलते जाना. जहाँ दीपक बुझे, वहाँ की जमीन खोदकर वहाँ का धन प्राप्त कर लेना. अंत में तुम्हारे पास एक दीपक और एक दिशा शेष रहेगी. किंतु तुम्हें न उस दीपक को जलाना है, न ही उस दिशा में जाना है.”

इतना कहकर संत लोभी व्यक्ति के घर और उस नगर से प्रस्थान कर गए. संत के जाते ही लोभी व्यक्ति ने पहला दीपक जला लिया और धन की तलाश में पूर्व दिशा की ओर चल पड़ा. एक जंगल में दीपक बुझ गया. वहाँ की खुदाई करने पर उसे एक कलश प्राप्त हुआ. वह कलश सोने के आभूषणों से भरा हुआ था.

लोभी व्यक्ति ने सोचा कि पहले दूसरी दिशाओं का धन प्राप्त कर लेता हूँ, फिर यहाँ का धन ले जाऊँगा. वह कलश वहीं झाड़ियों में छुपाकर उसने दूसरा दीपक जलाया और पश्चिम दिशा की ओर चल पड़ा. एक सुनसान स्थान में दूसरा दीपक बुझ गया. लोभी व्यक्ति ने वहाँ की जमीन खोदी. उसे वहाँ एक संदूक मिला, जो सोने के सिक्कों से भरा हुआ था.

लोभी व्यक्ति ने वह संदूक उसी गड्ढे में बाद में ले जाने के लिए छोड़ दिया. अब उसने तीसरा दीपक जलाया और दक्षिण दिशा की ओर बढ़ गया. वह दीपक एक पेड़ के नीचे बुझा. वहाँ जमीन के नीचे लोभी व्यक्ति को एक घड़ा मिला, जिसमें हीरे-मोती भरे हुए थे.

इतना धन प्राप्त कर लोभी व्यक्ति प्रसन्न तो बहुत हुआ, किंतु उसका लोभ और बढ़ गया. वह अंतिम दीपक जलाकर उत्तर दिशा में जाने का विचार करने लगा, जिसके लिए उसे संत ने मना किया था. किंतु लोभ में अंधे हो चुके व्यक्ति ने सोचा कि अवश्य उस स्थान पर इन स्थानों से भी अधिक धन छुपा होगा, जो संत स्वयं रखना चाहता होगा. मुझे तत्काल वहाँ जाकर उससे पहले उस धन को अपने कब्जे में ले लेना चाहिए. उसके बाद सारा जीवन मैं ऐशो-आराम से बिताऊंगा.

उसने अंतिम दीपक जला लिया और उत्तर दिशा में बढ़ने लगा. चलते-चलते वह एक महल के सामने पहुँचा. वहाँ पहुँचते ही दीपक बुझ गया.

दीपक बुझने के बाद लोभी व्यक्ति ने महल का द्वार खोल लिया और महल के भीतर प्रवेश कर महल के कक्षों में धन की तलाश करने लगा. एक कक्ष में उसे हीरे-जवाहरातों का भंडार मिला, जिन्हें देख उसकी आँखें चौंधियां गई. एक अन्य कक्ष में उसे सोने का भंडार मिला. अपार धन देख उसका लालच और बढ़ने लगा. कुछ आगे जाने पर उसे चक्की चलने की आवाज़ सुनाई पड़ी. वह एक कक्ष से आ रही थी. आश्चर्यचकित होकर उसने उस कक्ष का द्वार खोल लिया. वहाँ उसे एक वृद्ध व्यक्ति चक्की पीसता हुआ दिखाई पड़ा.

लोभी व्यक्ति ने उससे पूछा, “यहाँ कैसे पहुँचे बाबा?”

“क्या थोड़ी देर तुम चक्की चलाओगे? मैं ज़रा सांस ले लूं. फिर तुम्हें पूरी बात बताता हूँ कि मैं यहाँ कैसे पहुँचा और मुझे यहाँ क्या मिला?” वृद्ध व्यक्ति बोला.

लोभी व्यक्ति ने सोचा कि वृद्ध व्यक्ति से यह जानकारी प्राप्त हो जायेगी कि इस महल में धन कहाँ-कहाँ छुपा है और उसकी बात मानकर वह चक्की चलाने लगा. इधर वृद्ध व्यक्ति उठ खड़ा हुआ और जोर-जोर से हँसने लगा.

उसे हँसता देख लोभी व्यक्ति ने पूछा, “ऐसे क्यों हंस रहे हो?” यह कहकर वह चक्की बंद करने लगा.

“अरे अरे, चक्की बंद मत करना. अबसे ये महल तेरा है. इस पर अब तेरा अधिकार है और साथ ही इस चक्की पर भी. ये चक्की तुम्हें अब हर समय चलाते रहना है क्योंकि चक्की बंद होते ही ये महल ढह जायेगा और तू इसमें दब कर मर जायेगा.”

गहरी सांस लेकर वृद्ध व्यक्ति आगे बोला, “संत की बात न मानकर मैं भी लोभवश आखिरी दीपक जलाकर इस महल में पहुँच गया था. तब से यहाँ चक्की चला रहा हूँ. मेरी पूरी जवानी चक्की चलाते-चलाते निकल गई.” इतना कहकर वृद्ध व्यक्ति वहाँ से जाने लगा.

“जाते-जाते ये बताते जाओ कि इस चक्की से छुटकारा कैसे मिलेगा?” लोभी व्यक्ति पीछे से चिल्लाया.

“जब तक मेरे और तुम्हारे जैसा कोई व्यक्ति लोभ में अंधा होकर यहाँ नहीं आयेगा, तुम्हें इस चक्की से छुटकारा नहीं मिलेगा.” इतना कहकर वृद्ध व्यक्ति चला गया.

लोभी व्यक्ति चक्की पीसता और खुद को कोसता रह गया.

सीख - लालच बुरी बला है. इसलिए लालच कभी न करें.


Short Story In Hindi - शिक्षक की सीख


“सर, मैं इसकी बात क्यों सुनूं? ये जो कह रहा है, वो गलत हैं. ऐसे में इसकी बात सुनकर क्या फायदा?” दूसरा छात्र बोला.

इसके बाद दोनों फिर से आपस में उलझ गए. दोनों की सुलह कराने अध्यापक ने उन्हें अपने पास बुलाया. दोनों छात्र अध्यापक की डेस्क के पास जाकर खड़े हो गये. एक डेस्क की एक ओर और दूसरा डेस्क की दूसरी ओर.

अध्यापक ने डेस्क की दराज़ से एक गेंद निकाली और उसे डेस्क के बीचों-बीच रख दिया. उसके बाद वे दोनों छात्रों से बोले, “इस गेंद को देखकर बताओ, ये किस रंग की है?”

“ये सफ़ेद रंग की गेंद है सर.” पहला छात्र बोला.

“नहीं सर, ये तो काली है.” दूसरा छात्र बोला.

दोनों के उत्तर एक-दूसरे से भिन्न थे. लेकिन दोनों अपनी बात पर अडिग थे. दोनों में फिर तू-तू मैं-मैं होने लगी. अध्यापक ने दोनों को शांत कर अपने स्थान बदलने को कहा. दोनों ने अपने स्थान बदल लिए.

“अब गेंद को देखकर बताओ कि ये किस रंग की है?” अध्यापक ने फिर से वही प्रश्न दोहराया.

इस बार भी दोनों के जवाब एक-दूसरे से भिन्न थे. अब पहले छात्र ने कहा, “सर, गेंद काली है.” और दूसरे छात्र ने कहा, “सर, गेंद सफ़ेद है.” लेकिन अबकी बार वे अपने खुद के जवाब से हैरान भी थे.

अध्यापक दोनों को समझाते हुए बोले, “ये गेंद दो रंगों की बनी हुई है. एक तरफ से देखने पर सफ़ेद दिखती है, तो दूसरी तरफ से देखने पर काली. तुम दोनों के जवाब सही हैं. फर्क बस तुम्हारे देखने में है. जिस जगह से तुम इस गेंद को देख रहे हो, वहाँ से तुम्हें ये वैसे रंग की दिखाई दे रही है. जीवन भी ऐसा ही है. जीवन में भी किसी चीज़, परिस्थिति या समस्या को देखने का नज़रिया भिन्न हो सकता है. ये ज़रूरी नहीं कि जिसका मत आपसे भिन्न है, वो गलत है. ये बस नज़रिये का फर्क है. ऐसे में हमें विवाद में पड़ने के स्थान पर दूसरे के नज़रिये को समझने का प्रयास करना चाहिए. तभी हम किसी की बात बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और अपनी बात बेहतर ढंग से समझा पाएंगे.”

दोनों छात्रों को अध्यापक की बात समझ में आ गई और दोनों ने अपना झगड़ा भुलाकर सुलह कर ली.

सीख - जीवन में परिस्थितयाँ भिन्न हो सकती हैं. उन परिस्थितियों के प्रति लोगों का नज़रिया भिन्न हो सकता है. हम अक्सर किसी भी परिस्थिति को जाने बिना अपनी टिप्पणी दे देते हैं और अपनी बात पर अड़ जाते हैं. ऐसे में विवाद या बहस की स्थिति निर्मित होती है, जो अंततः संबंध बिगड़ने का कारण बन जाती है. इसलिए किसी भी बात पर अपनी टिप्पणी देने के पहले परिस्थिति या मामले की अच्छी तरह जानकारी ले लेना चाहिए. साथ ही यदि मतभिन्नता की स्थिति बने, तो दूसरे के नज़रिये को समझने को कोशिश करना चाहिए. ताकि विवाद नहीं बल्कि बेहतर संवाद स्थापित हो सके.     


Short Story In Hindi - पेड़ का रहस्य    


सुनसान जगह इतना आलीशान मकान देखकर चोरों के एक समूह ने वहाँ चोरी करने की योजना बनाई. चोरी के पहले वे मैनेजर घर के पास चक्कर मारकर उसके घर की गतिविधियों का जायज़ा लेने लगे.

पहले ही दिन उनकी नज़र मैनेजर की एक अजीब हरक़त पर पड़ी. घर आने के बाद वह सबसे पहले अपने बगीचे में लगे आम के पेड़ के पास गया और अपने ऑफिस बैग से एक-एक कर कुछ निकालने लगा और उसे पेड़ में कहीं डालने लगा.

मैनेजर की पीठ चोरों की तरफ होने के कारण चोर ये देख नहीं पाए कि उसने अपने बैग में से क्या निकाला और पेड़ में किस जगह डाला? उन्होंने अंदाज़ा लगाया कि ये अवश्य ही कोई कीमती चीज़ होगी.

चोर मैनेजर के घर के पास घात लगाकर बैठ गए और अंधेरा होने का इंतज़ार करने लगे. रात में जब घर की लाइट्स बुझ गई, तो उन्हें इत्मिनान हुआ कि घर में सब सो गए हैं.

वे दीवार फांद कर घर में घुसे और सीधे आम के पेड़ के पास पहुँचे. फिर बिना समय गंवायें वे वहाँ मैनेजर की छुपाई चीज़ खोजने लगे. लेकिन बहुत खोजने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला. आखिरकार थक-हारकर वे वापस लौट गए.

अगले दिन वे फिर उस घर के पास छुपकर बैठ गए. मैनेजर जब ऑफिस से वापस आया, तो चोरों की नज़रें फिर उस पर ही गड़ गई. पिछले दिन की तरह वह सबसे पहले आम के पेड़ के पास गया और बैग से निकालकर उसमें कुछ डालने लगा. फिर वह घर के अंदर चला गया.

उस रात घर की लाइट्स बंद हो जाने के बाद फिर से चोर दीवार फांद आम के पेड़ के पास पहुँचे और जी-जान से उन चीजों को खोजने में लग गए, जो मैनेजर ने वहाँ छुपाई थी. लेकिन उन दिन उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ.

कुछ दिन तक वे रोज़ रात में आम के पेड़ के पास खोजबीन करते रहे. लेकिन उनके हाथ कुछ न लगा. वे परेशान हो गए कि मैनेजर आखिर कैसे उन चीज़ों को पेड़ में छुपाता है कि हम जैसे शातिर चोर भी उन्हें ढूंढ नहीं पा रहे हैं. अब चोरों में चोरी करने से ज्यादा इस रहस्य को जानने की जिज्ञासा पैदा हो गई.

आखिरकार अपनी जिज्ञासा शांत करने रविवार के दिन वे सभी मैनेजर से मिलने उसके घर पहुँचे. मैनेजर का उन्होंने शरीफ़ों की तरह अभिवादन किया.

फिर चोरों का सरदार बोला, “सर….प्लीज बुरा मत मानियेगा. एक बात आपसे पूछनी थी. हम लोग चोर हैं. पिछले कुछ दिनों से आपके घर चोरी करने की फ़िराक में हैं. हम रोज़ देखते हैं कि आप शाम को घर आकर आम के पेड़ में कुछ डालते हैं. लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी हम वो चीज़ें ढूंढ नहीं पाए. हम सब ये जानने को बेचैन हैं कि आप वहाँ चीज़ें कैसे छुपाते हैं कि वो मिलती नहीं हैं?”

चोरों की बात सुनकर मैनेजर हँस पड़ा, फिर बोला, “अरे भाई…..मैं वहाँ कुछ भी नहीं छुपाता. तुम लोगों को ग़लतफ़हमी हो गई है.”

“नहीं सर, हमने देखा है. आप रोज़ शाम को अपने बैग में से कुछ निकालकर पेड़ में डालते हैं. आप वहाँ कुछ न कुछ तो छुपाते हैं.” चोर एक स्वर में बोले.

अब मैनेजर गंभीर हो गया और बोला, “मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में सेल्स मैनेजर हूँ. काम का दबाव बहुत अधिक रहता है. जिस कारण तनाव होना लाज़िमी है. किसी भी हाल में टारगेट पूरा करना ही होता है. इसके लिये रोज़ किसी न किसी से झिक-झिक होती है. कस्टमर के ताने सुनने पड़ते हैं. बॉस की डांट झेलनी पड़ती है. मानसिक तनाव इतना अधिक होता है कि घर आने पर भी नहीं जाता. पहले अक्सर मेरे तनाव को बेवजह मेरे परिवारजन झेलते थे.”

कुछ देर रुककर मैनेजर आगे बताने लगा, “….जब मैंने ये नया घर बनवाया, तो सोचा कि इस घर का माहौल मैं शांतिपूर्ण रखूंगा. कभी ऑफिस का तनाव घर लेकर नहीं लाऊंगा. इसलिए घर आने के बाद मैं सबसे पहले आम के पेड़ के पास जाता हूँ और अपना पूरा तनाव एक-एक कर वहाँ डाल देता हूँ. कमाल की बात ये है कि अगले दिन जब मैं वो उठाने जाता हूँ, तब तक आधा तनाव तो गायब हो जाता है. जो थोड़ा-बहुत बचता है, उसे मैं अपने साथ ले जाता हूँ. लेकिन फिर जब शाम को घर आता हूँ, तो तनाव पेड़ के पास छोड़ जाता हूँ. यही पेड़ का रहस्य है.”

मैनजर की बात सुनकर चोरों को पेड़ का रहस्य समझ आया. चोरी करने में तो वे सफ़ल नहीं हो सके. लेकिन जीवन की एक बहुत बड़ी सीख उन्हें ज़रूर मिली.

सीख - आज के दौर में जिंदगी में सुख-सुविधाओं के साधन तो बढ़ते जा रहे हैं और ज़िन्दगी आरामदायक होती जा रही हैं. लेकिन कहीं न कहीं तनाव भी बढ़ता जा रहा है. अक्सर आपने देखा होगा कि लोग ऑफिस का तनाव अपने घर ले आते हैं. इस तरह वे घर पर भी सुकून से नहीं रह पाते हैं, साथ ही अपने तनाव से परिवारजनों को भी प्रभावित करते हैं. क्या हर समय तनाव का बोझ ढोना आवश्यक है? क्या इस तरह जिंदगी कुछ ज्यादा कठिन नहीं बनती जा रही? तनाव को एकदम से तो समाप्त नहीं किया जा सकता. लेकिन कम से कम घर पर परिवारजनों के साथ होने पर तो तनाव को दूर रखा जा सकता है और उनके साथ खुशनुमा पल बिताये जा सकते हैं. इसलिए जब भी घर आयें, तनाव को बाहर ही छोड़ आयें. 


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