Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के चौथे भाई काने अलकूज की कहानी ( 5043 )

Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के चौथे भाई काने अलकूज की कहानी

Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के चौथे भाई काने अलकूज की कहानी
Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के चौथे भाई काने अलकूज की कहानी


अपने तीसरे भाई की कहानी सुनाने के बाद, नाई ने अपने चौथे भाई की कहानी सुनाई। नाई का चौथा भाई था, अलकूज जिसकी एक आंख नहीं थी। उसकी एक आंख न होने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प थी। नाई ने बताया कि उसका भाई एक कसाई था। उसे भेड़-बकरियों को परखने की अच्छी जानकारी थी। इसके साथ वह भेड़ों को लड़ाया भी करता था। उसे भेड़ों-बकरियों की कई किस्मों के बारे में भी खूब जानकारी थी। नगर के कई बड़े लोग उसकी भेड़ों की लड़ाई देखने आते थे। अलकूज भेड़-बकरियों का मांस भी बेचता था। इस तरह वह नगर में काफी प्रसिद्ध था।

एक बार एक बूढ़ा आदमी अलकूज के पास आया और उससे चार से पांच किलो मांस लेकर चला गया और बदले में उसे चांदी के नए चमचमाते सिक्के दे गया। चांदी के चमकते सिक्के देखकर अलकूज खुश हो गया और उसने उन्हें अपने संदूक में अलग रख दिया। फिर पांच महीने तक रोज इसी तरह वह बुजुर्ग आदमी अलकूज के पास आता रहा और उसे मांस के बदले चांदी के सिक्के देता रहा।

ऐसे ही दिन बीतते जा रहे थे, लेकिन एक दिन जब अलकूज ने अपना संदूक खोल कर देखा, तो वह दंग रह गया। उसने देखा कि वो चांदी के सिक्के कागज के टुकड़ों में बदल चुके थे। अलकूज यह देख कर बहुत दुखी हुआ और रोने-चिल्लाने लगा। उसने रो-रोकर सारे नगर को इकठ्ठा कर लिया था। लोगों ने जब अलकूज की आवाज सुनी, तो सभी उसके पास जमा हो गए। अलकूज ने नगरवासियों को अपनी कहानी सुनाई।

अलकूज आखिर क्या करता बस रोता रहा और मन ही मन उस बुजुर्ग आदमी को कोसता रहा। उसके मन में आता रहा कि अगर वह बुजुर्ग आदमी उसे मिल जाए, तो वह उसकी अच्छे से खबर ले। अलकूज अपने गुस्से को मन ही मन बढ़ा रहा था कि तभी गली में उसे वही बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। अलकूज ने तुरंत उसे पकड़ लिया और फिर जोर-जोर से चिल्लाकर आसपास के सभी लोगों को इक्कठा कर लिया। अलकूज ने सभी को उस लालची और धोखेबाज बूढ़े की हरकत के बारे में बता दिया।

मेरे भाई के इस तेवर और उसके द्वारा सुनाई गई कहानी के बीच वह धोखेबाज बूढ़ा कूद पड़ा और बोला, ‘अच्छा होगा कि तुमने जो मेरा अपमान किया है और मुझे जो बुरा-भला सुनाया है, उसके लिए तुम मुझसे माफी मांग लो। तुमने जो मुझपर यह झूठा आरोप लगाया है, उसे वापस ले लो और अगर तुमने ऐसा नहीं किया, तो मैं तुम्हारा ऐसा अपमान कराऊंगा कि तुम कभी नहीं भूलोगे।’ वह बुजुर्ग व्यक्ति इतना कहकर भी चुप नहीं हुआ। उसने गुस्साते हुए मेरे भाई को कहा कि ‘मैं नहीं चाहता कि तुम जो लोगों को भेड़ का मांस कह कर खिलाते हो, उसकी सच्चाई का लोगों को पता चले।’ तभी मेरा भाई क्रोधित होकर बोला, ‘यह क्या अजीब बकवास की बात कर रहे हो तुम। तुम्हें जो करना है करो, लेकिन मैं डरता नहीं हूं। मैंने कभी किसी का बुरा और कभी किसी के साथ धोखेबाजी नहीं की, तो मुझे कोई डर नहीं है।’

इतना सुनते ही बूढ़ा भड़क गया और मेरे भाई से कहने लगा, ‘तू अगर नहीं मान रहा, तो ले करा ले अपनी बेइज्जती। सुनो भाई लोग, यह कसाई आप सभी को भेड़-बकरी का नहीं, बल्कि अब तक इंसान का मांस बेचता आया है।’ इतना सुनते ही मेरा भाई अलकूज चिल्ला पड़ा और बोला, ‘अरे पापी, तू बुढ़ापे में भी झूठी बातें करने से बाज नहीं आ रहा। क्यों इस तरह की अफवाह फैला रहा है, क्यों इतना झूठ बोल रहा है?’

वह बूढ़ा अब भी बाज न आया और चिल्लाते हुए कहने लगा, ‘मैं क्यों झूठ बोलूंगा, मैं तो सच बोल रहा हूं। अभी भी तुम्हारे दुकान में एक बिना सिर वाली आदमी की लाश पड़ी है। अगर किसी को सच जानना है, तो वो वहां जाकर देख सकता है। भाईयों आप लोग इसकी दुकान में जाकर देखो और बताओ यह झूठ बोल रहा है या मैं।’ अलकूज ने भी बिना डरे, तिलमिलाते हुए कहा कि ‘जो मेरी दुकान में आना चाहता है आ जाए और मेरी दुकान के अंदर आकर देख ले।’

दोनों के इस कहा-सुनी के बाद सभी ने तय किया कि वे लोग उस बूढ़े के साथ मेरे भाई के दुकान पर जाएंगे। अगर बूढ़े की बात झूठ निकली, तो जितना रुपया उसपर बनता है उससे दोगुना उससे वसूल करेंगे। जब सभी दुकान के अंदर गए और उन्होंने जो देखा उससे उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं। दुकान के अंदर सच में भेड़-बकरी के मीट के बजाय एक इंसान का मीट टंगा था।


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