Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के छठे भाई कबक की कहानी ( 5048 )

Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के छठे भाई कबक की कहानी

Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के छठे भाई कबक की कहानी
Alif Laila Story - ( Part - 1 ) नाई के छठे भाई कबक की कहानी


पांचवे भाई की कहानी पूरी करने के बाद नाई कहता है कि अब मैं आपको अपने छठे भाई कबक की कहानी सुनाऊंगा। कहानी पूरी करने के बाद मैं यहां से चला जाऊंगा। नाई कहता है, मेरे छठे भाई का नाम कबक था और वो बिल्कुल खरगोश के जैसे चलता था। उसके होंठ भी खरगोश के जैसे ही थे। जब मेरे पिता का देहांत हुआ, तो बंटवारे में कबक को उसके हिस्से के पैसे मिल गए, जिन्हें लेकर उसने व्यापार किया और मुनाफा भी कमाया। लेकिन, बुरी किस्मत के कारण कुछ ही समय में उसे बहुत नुकसान हुआ और वह भिखारी बन गया।

भिखारी बनने के बाद उसने अपना दिमाग लगाया और वह पैसे वालों के यहां जाने लगा, जहां वह उनके नौकरों को कुछ पैसा देकर उन्हें अपनी तरफ कर लेता। नौकर उसे अपने मालिक से मिलवाते और उसे लाचार और गरीब बताकर भीख में पैसे दिलवाले थे।

एक दिन की बात है, ऐसे ही एक शहर से दूसरे शहर घूमते हुए मेरा भाई एक दिन बगदाद के एक विशाल भवन के सामने पहुंच गया। वहां जाकर उसने काम कर रहे एक नौकर से पूछा कि भाई यह भव्य भवन किसका है? नौकर ने कहा कि लगता है कि तुम बाहरी व्यक्ति हो, जिसे हमारे मालिक के बारे में नहीं पता। मेरे मालिक बरमकी बहुत महान इंसान हैं और जो भी उनके पास जाता है, वह माला-माल हो जाता है। नौकर की बात सुनकर कबक की आंखों में चमक आ जाती है और वह नौकर से मालिक के पास ले जाने का निवेदन करता है।

नौकर कबक को भवन के अंदर ले जाता है। अंदर जाते ही भवन की सुंदरता देख मेरे भाई की आंखें खुली की खुली रह जाती हैं। उसने वहां संगमरमर का फर्श, रेशमी परदे और कई खूबसूरत नजारे देखें। वो दोनों एक बरामदे में पहुंचे, जहां से मेरे भाई को सोने की गद्दी पर बैठा एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। मेरा भाई समझ गया कि यह बरमकी है। मेरे भाई ने बरमकी को सलाम किया। 

मेरे भाई को सलाम करता देखकर बरमकी ने कहा कि कहो अजनबी, तुम यहां किस लिए आए हो? क्या तुम्हें कोई तकलीफ है? मेरे भाई ने कहा कि मैं बहुत गरीब हूं और आप जैसे दयालु इंसान से कुछ मांगना चाहता हूं। बरमकी ने कहा कि मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरे बगदाद में कोई निर्धन भी है। बरमकी ने कहा कि मैं तुम्हें खाली हाथ नहीं जाने दूंगा। मैं तुम्हें ऐसा दान दूंगा कि तुम जीवन भर याद रखोगे। इसके बाद कबक ने कहा कि मालिक मैंने बहुत दिनों से कुछ खाया भी नहीं है। आपकी कृपा हो, तो मुझे कुछ खाने के लिए दे दीजिए। बरमकी ने कहा कि मैं अभी अपने नौकरों को बुलाकर तुम्हारे लिए खाना मंगवाता हूं। आज तुम मेरे साथ ही खाना खा लेना।

बरमकी ने नौकर को आवाज लगाई, लेकिन कोई नहीं आया। फिर भी बरमकी ऐसा करने लगा कि जैसे कोई आ गया है और उसके हाथ धुला रहा है। बरमकी ने कबक से कहा कि तुम भी हाथ धो लो। लेकिन, कबक को कोई दिखाई नहीं दिया। मेरे भाई ने भी बरमकी की तरह झूठ-मूठ हाथ धो लिए। 

इसके बाद बरमकी ने कहा कि लो भाेजन भी आ गया, लेकिन कबक को कुछ दिखाई नहीं दिया। इसके बाद बरमकी ठीक से बैठा और अपना हाथ अपने मुंह तक ऐसे ले गया जैसे वह कोई निवाला खा रहा हो और वह चबाने का नाटक करने लगा। उसने मेरे भाई की ओर देखा और कहा कि मित्र क्या देख रहे हो, तुम भी खाओ। कबक जो सच में भूखा था, वह इस दावत को देखकर हैरान रह गया, लेकिन कुछ नहीं बोला।

तभी बरमकी ने कहा कि क्या हुआ भाई, तुम खा क्यों नहीं रहे हो? क्या तुम्हें शीरमाल और कबाब अच्छे नहीं लगते? मेरे भाई ने बरमकी की बात सुनी और उसने भी झूठ-मूठ खाने का नाटक शुरू कर दिया। अपने झूठ-मूठ के खाने की तारीफ करते हुए उसने कबक से पूछा कि मेरे भाई सच बताना, क्या तुमने कभी इतना स्वादिष्ट खाना खाया है? ये लो बत्तख और मुर्गे का स्वादिष्ट मांस चखो और हां यह बकरी का भुना गोस्त खाना मत भूलना। बरमकी ने एक-एक करके सब कुछ झूठ-मूठ खाया और  कबक को अपने हाथ से भी खिलाया।

कुछ देर के बाद कबक भी झूठ-मूठ खाने की तारीफ करने लगा और कहने लगा कि मालिक मैंने आज तक इतना स्वादिष्ट खाना नहीं खाया। मेरा तो आज पेट और मन दाेनों भर गए। इसके बाद बरमकी ने अपने झूठ-मूठ के नौकर को बुलाया और कहा कि यह सब बर्तन यहां से ले जाओ और शराब लेकर आओ। 

कुछ देर बाद बरमकी ने कबक से कहा कि लो भाई यह शराब तो चखो और बताओ कि क्या स्वाद है इसका। इस बात पर कबक ने कहा कि मालिक मेरे यहां ना तो शराब पीते हैं और न ही पिलाते हैं। लेकिन, बरमकी ने बहुत जोर देकर कहा और झूठ-मूठ की शराब कबक को पिला दी। इसके बाद कबक ने कहा कि मैंने ताे सुना था कि शराब में नशा होता है, लेकिन इसे पीने के बाद मुझे कोई नशा नहीं हुआ। 

तब बरमकी ने कहा कि रुको मैं तुम्हें तेज नशे वाली शराब देता हूं, उसे पीकर बताना। इसके बाद बरमकी ने झूठ-मूठ का गिलास कबक की ओर बढ़ाया और कहा कि इसे पिओ। कबक ने झूठ-मूठ की शराब पी ली और ऐसा नाटक करने लगा जैसे उसे सच में नशा चढ़ गया हो। उसने उठकर बरमकी को पीटना शुरू कर दिया। बरमकी ने कहा कि क्या तुम पागल हो गए हो? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मारने की। तब कबक ने कहा कि मालिक मुझे माफ कर दो, मैंने तो पहले ही कहा था कि मेरे यहां कोई भी शराब नहीं पीता है, यह उसके नशे का ही असर है।


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