Alif Laila Story - ( Part - 1 ) लंगड़े आदमी की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 1 ) लंगड़े आदमी की कहानी |
नाई की तरफ पीठ करके लंगड़े ने अपनी कहानी शुरू की। मेरे पिता बगदाद के जाने-माने लोगों में से एक थे। उन्होंने मुझे पढ़ा लिखाकर इतना काबिल बना दिया था कि मैं व्यापार भी अच्छे से करता था। एक दिन पिता ने बीमारी की वजह से सारी धन-दौलत मेरे नाम कर दी और चल बसे।
एक बार की बात है, मैं कहीं जा रहा था और तभी सामने से कुछ स्त्रियां मुझे आती दिखाई दीं। मुझे स्त्रियों से शर्म आती थी, इसलिए मैं पास की गली में जाकर एक घर के किनारे में छुप गया। मैंने जैसे ही उस मकान की खिड़की से अंदर झांका, तो मुझे एक सुंदर लड़की दिखाई दी, जो पौधों को पानी दे रही थी।
वो इतनी सुंदर थी कि मैं उसे देखते ही रह गया। वो लड़की मुझे देखकर मुस्कुराई और थोड़ी देर बाद खिड़की बंद करके वहां से चली गई। उसके जाने के बाद मैं इतना दुखी हुआ कि मैं बेहोश हो गया। जब मुझे होश आया, तो मैंने उस मकान में एक काजी को जाते देखा। मुझे लगा कि वो उस लड़की का ही पिता होगा।
इसी सोच के साथ मैं घर लौट गया। दो-चार दिनों तक उस लड़की को न देख पाने के कारण मेरी तबीयत खराब हो गई। दिन-ब-दिन मेरी हालत बिगड़ती गई। मेरे दिमाग में वो लड़की थी, जिसे मैंने देखा था। मेरी हालत देखकर मेरे दोस्तों और रिश्तेदारों ने कई हकीम बुलवाए, लेकिन किसी की भी दवा का असर न हुआ और मेरी तबीयत और बिगड़ती चली गई।
फिर एक दिन एक बूढ़ी महिला मुझे देखने के लिए आई। उसने भी कुछ देर तक मुझे अच्छे से देखा, लेकिन उसे भी कुछ समझ नहीं आया। फिर उस बूढ़ी महिला ने मेरे कमरे में मौजूद सभी लोगों को बाहर जाने के लिए कहा। उसके बाद उसने मुझसे पूछा कि तुम्हारे मन में क्या चल रहा है।
मैंने ध्यान से तुम्हें देखा है, तुम्हें किसी तरह का रोग नहीं है। शायद तुम्हें किसी से प्रेम हो गया है और तुम अपनी बात किसी को बता नहीं पा रहे हो। तुम अब जल्दी से अपने मन में चल रही बात बता दो। ऐसा करने से सारी बीमारी ठीक हो जाएगी।
मैं शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रहा था, लेकिन उस बूढ़ी महिला की जिद के आगे मेरी एक न चली। मैंने उस लड़की के बारे में सब कुछ बता दिया और कहा कि एक बार उसकी झलक देख लूं, तो शायद कुछ ठीक लगे। फिर मैंने उस जगह के बारे में बताया जहां मैंने उस लड़की को देखा था।
तब उस बूढ़ी महिला ने कहा कि मैं समझ गई हूं कि तुम किसकी बात कर रहे हो। उस लड़की जैसा पूरे बगदाद में कोई नहीं है, लेकिन उसका पिता अजीब है। वो अपनी बेटियों को घर में ही बंद रखता है और घर से बाहर निकलने पर उनकी आंखों पर पट्टी बंधवा देता है, ताकि वे किसी लड़के को देख न सकें।
बुढ़िया की बातें सुनकर मैं दुखी हो गया। फिर उसने कहा कि शायद तुम्हारी किस्मत अच्छी हो। तुम अपनी कोशिश जारी रखना। इतना कहकर वो वहां से चली गई और कुछ दिनों बाद वो बुढ़िया दोबारा आई और उसने कहा कि मैंने उस लड़की से बात की वो भी अपने पिता जैसी ही है। जैसे ही मैंने उसे तुम्हारे बारे में बताया, तो वो मुझपर चिल्लाई और मुझे वहां से भगा दिया। इतना कहकर बुढ़िया वहां से चली गई। दिन जैसे-जैसे बीत रहे थे, मेरी तबीयत वैसे-वैसे खराब हो रही थी। एक दिन बूढ़ी महिला दोबारा आई, लेकिन मेरे आसपास कई सारे लोग थे।
सबको देखकर उसने मेरे कान में कहा कि तुम्हारे लिए खुशखबरी है। यह सुनते ही मेरे अंदर नई जान आ गई और मैंने सबको कुछ देर के लिए बाहर जाने के लिए कहा और बूढ़ी महिला से बात की। तब उन्होंने बताया कि वो लड़की से मिलने गई थी। मैंने रोते हुए कहा कि वो लड़का बहुत बीमार है, लेकिन तुम इतनी कठोर हो कि उससे मिलने को तैयार नहीं हो। ऐसे तो वो मर जाएगा। फिर उसने कहा कि मैं उसे जानती भी नहीं हूं।
उससे कैसे मिलने चली जाऊं। तब मैंने बताया कि वो तुम्हारे घर के किनारे खड़ा था और खिड़की से तुम्हें देखा था। तब उसने कहा कि ठीक है, मैं उससे मिल लूंगी, लेकिन इससे ज्यादा मुझसे और कोई उम्मीद मत करना। उसने शुक्रवार को तुम्हें मिलने के लिए बुलाया है। यह सुनते ही मैं बहुत खुश हुआ। मैंने उस बुढ़िया का धन्यवाद किया और उसे इनाम के रूप में कुछ मुद्राएं दीं। फिर मैं अच्छे से नहा धोकर तैयार हुआ और अपने करीबी लोगों से मिलने गया।
लड़की के पास जाने से पहले मैंने बाल बनवाने के लिए घर में ही नाई को बुलवा लिया। उसने मुझे कहा कि आज का दिन बाल कटवाने के लिए अच्छा है, लेकिन आपके ग्रह कह रहे हैं कि आज आपको बहुत बड़ा दुख मिलने वाला है, लेकिन आप अगर मुझे अपने साथ रखोगे, तो सब ठीक होगा।
ऐसी ही वो न जाने कितनी फालतू बातें करने लगा। तब मैंने उसे कहा कि तुम बहुत बोलते हो, चुपचाप से अपना काम करो। उसके बाद नाई ने कहा कि मेरे छह भाई हैं, एक बकबक, दूसरा बकबारह, तीसरा बूबक, चौथा अलकूज, पांचवा अलनसचर, छठा शाहकुबक और मैं सबसे छोटा भाई हूं, जो सबसे कम बोलता हूं।
उसकी बातें सुनकर मैं परेशान हो गया और उसे पैसे देकर घर से जाने के लिए कहा। यह बात सुनकर वो गुस्सा हो गया। उसने बताया कि मेरे पिता ने उसके काम से खुश होकर इतने पैसे दिए थे कि उसकी पूरी जिंदगी भर की जरूरत पूरी हो गई थी। वो उसकी काबिलियत को समझते थे, लेकिन मैं नहीं समझता हूं। ऐसी ही वो न जाने कितनी बातें कहने लगा। इससे परेशान होकर मैं चुपचाप बैठ गया।
मुझे चुप देखकर उसने मेरे बाल काटने शुरू कर दिए। सिर के एक हिस्से के बाल की छटनी करने के बाद उसने कहा कि आपको कहां जाना है। मैंने सोचा अगर इसे जवाब न दिया, तो मेरे बाल नहीं काटेगा। मैंने यूं ही कह दिया कि दोस्त के घर दावत पर जाना है।
