Alif Laila Story - ( Part - 2 ) लंगड़े आदमी की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 2 ) लंगड़े आदमी की कहानी |
मेरी इस बात को सुनते ही उसने कहा कि फिर तो मैं भी आपके साथ चलूंगा। मैंने उसे मना कर दिया। तब उसने मेरे पिता का जिक्र करते हुए कहा कि आपके पिता तो मुझे कितनी दावतें देते थे और आप हैं कि एक दावत में नहीं ले जा सकते। तब मैंने अपनी रसोई में काम करने वाले लोगों को बुलाया और कहा कि आज इनके घर सारा खाना पहुंचा देना।
इतने में वो नाई बोला कि कम से कम 80 लोगों का खाना चाहिए, क्योंकि मेरे दोस्त भी आ रहे हैं। मैंने कहा ठीक है सब मिल जाएगा। यह सुनने के बाद उसने कुछ ही देर में मेरे बाल और दाढ़ी की अच्छे से छटाई कर दी।
फिर मैंने उसे कुछ पैसे दिए और जाने के लिए कहा। वो धन्यवाद कहकर चला गया। तब मैंने भी मुंह धोया और उस लड़की से मिलने के लिए निकल गया। मैं जैसे ही उसके घर के पास पहुंचा, तो मैंने देखा कि वो नाई मेरे पीछे-पीछे आ रहा था।
तभी मेरे सामने वो बूढ़ी महिला आई और मुझे लड़की के घर लेकर चली गई। मैंने काफी देर तक उस लड़की से बात की। कुछ देर बाद दो आदमियों की आवाज आने लगी। जैसे ही हमने खिड़की से देखा, तो लड़की के पिता आ रहे थे। लड़की डर गई और उसने जल्दी से मुझे एक संदूक में छुपा दिया।
तभी उसके पिता घर के अंदर आए और नाई बाहर खड़ा ये सब देख रहा था। काजी ने घर के अंदर आते ही अपने घर के एक सेवक को खूब डांटा और वो डर के मारे जोर-जोर से रोने लगा। बाहर खड़े नाई को लगा कि लड़की के पिता ने मुझे पकड़ लिया है। इतने में उसने बाहर शोर मचाना शुरू कर दिया और आसपास के लोगों को इकट्ठा कर लिया। उसने सभी लोगों से कहा कि ये काजी मेरे मालिक को मार रहा है। घर के अंदर से आवाजें आ ही रही थीं, जिसकी वजह से नाई की बातों को सबने सच मान लिया।
सब लोग काजी के घर के दरवाजे के बाहर जमा हो गए और दरवाजा पीटने लगे। जैसे ही घर का दरवाजा खुला सब लोग अंदर घुस गए। काजी ने कहा तुम लोगों को क्या हो गया है, इस तरह से अंदर आ गए। लोगों ने कहा कि तुम इस नाई के मालिक को मार रहे हो।
उसने हैरान होकर कहा कि मैंने किसी के मालिक को नहीं मारा। मैं भी अंदर डर रहा था कि इस नाई की वजह से जरूर पकड़ा जाऊंगा। तभी नाई ने कहा कि ये काजी झूठ बोल रहा है। इसकी बेटी ने मेरे मालिक को मिलने के लिए बुलाया था। वो यहां आया था और तभी ये घर वापस आ गया। इसने उसे देखा और मारने लग गया।
इस बात को सुनकर काजी ने कहा कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है। तुम्हारा मालिक यहां नहीं आया है, तुम घर के अंदर जाकर देख सकते हो। यह सुनकर नाई और अन्य सभी लोग घर में इधर-उधर मुझे ढूंढने लग गए। तभी नाई की नजर उस संदूक पर पड़ी, जिसके अंदर मैं था।
उसने उस संदूक के ढक्कन को हल्का सा खोला और मुझे देख लिया। मुझे देखते ही वो नाई उस संदूक को अपने सिर पर लेकर भागने लगा। सब लोग हैरान थे, इसलिए चुपचाप देखते रहे। जैसे ही नाई काजी के घर से कुछ दूर गया, तो संदूक गिर गया और उसका ढक्कन खुलने की वजह से मैं उससे बाहर निकल गया।
मैं डर कर जल्दी से उठा और अपना मुंह छुपाते हुए भागने लगा। मेरे पीछे-पीछे नाई भी भाग रहा था और उसके पीछे वो लोग दौड़ रहे थे, जिन्हें लेकर वो काजी के घर पहुंचा था। तभी मैंने तेजी में नाले को पार करने के लिए छलांग लगाई और उसी समय मेरा पैर फिसल गया, जिसके कारण मेरी एक टांग टूट गई। टूटा पांव लेकर मैं किसी तरह भागा और पीछे लोगों की तरफ कुछ मुद्राएं फेंक दी, ताकि वो उसे उठाने के चक्कर में न दौड़ें। सब पैसे देखकर उसे बटोरने लग गए और मैं लंगड़ाते हुए काफी दूर पहुंच गया, लेकिन वो नाई मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा था।
तभी नाई मेरे पास पहुंचा और कहने लगा कि मैंने आपको बचा लिया, वरना आपकी मौत तय थी। लंगड़े आदमी ने लोगों को कहानी सुनाते हुए कहा कि मेरी ऐसी हालत करने के बाद भी यह नाई अपनी तारीफ कर रहा था।
मुझे गुस्सा तो इतना आ रहा था कि उसे मार दूं, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया और पास के ही अपने एक दोस्त के घर चला गया। मेरा दोस्त मेरी टूटी टांग के बारे में पूछ ही रहे थे कि तभी ये नाई भी वहां पहुंच गया। तब मैंने अपने दोस्त को उसे डांटकर वहां से भगाने के लिए कहा। मेरे दोस्त ने ठीक ऐसा ही किया। फिर मैंने अपने दोस्त को सब कुछ बता दिया।
उस दिन जो कुछ भी हुआ था उसके बाद मैं किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं था, इसलिए कुछ दिनों तक अपने दोस्त के घर में ही रहा। किसी तरह पैसों का इंतजाम करके पैर के दर्द को ठीक करवाया, लेकिन हड्डी टूटने के कारण मेरा पैर ठीक नहीं हो पाया और वो टूटा का टूटा ही रह गया। उसके बाद मैंने बगदाद को छोड़ दिया और यहां आकर अपना घर बसा लिया, लेकिन यह नाई मुझे इधर भी मिल गया।
अपनी कहानी खत्म करके लंगड़े ने दावत में आए सभी लोगों से कहा कि बताओ इस नाई की वजह से मेरी क्या हालत हो गई है। अब मैं इस नाई को देखकर गुस्सा न करूं, तो क्या करूं? इसकी वजह से मैं जिस लड़की से प्यार करता था उससे दूर हो गया। इसकी वजह से मुझे शहर छोड़ना पड़ा। इतनी बदनामी सहनी पड़ी और जिंदगी भर के लिए लंगड़ा हो गया।
इतनी कहानी सुनाकर लंगड़ा व्यक्ति सब लोगों के सामने से चला गया। उसकी कहानी सुनकर सब लोग वहां मौजूद नाई से पूछने लगे कि तुमने ऐसा क्यों किया? अगर तुमने ऐसा किया है, तो तुम काफी खतरनाक और मूर्ख आदमी हो। तुम्हें अपनी करनी की सजा जरूर मिलनी चाहिए।
तब नाई ने कहा कि मैंने कुछ नहीं किया। अगर उस दिन मैं नहीं होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। उसने मुझे कहा कि मैं बहुत बोलता हूं, लेकिन मैं अपने भाइयों में से सबसे कम बोलता हूं। अब मैं अपनी और अपने भाइयों की कहानी सुनाता हूं।
