Alif Laila Story - ( Part - 2 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
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| Alif Laila Story - ( Part - 2 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी |
शहजादे को देखते ही जिन्न ने कहा कि दोनों में ज्यादा सुंदर कौन है, इसका फैसला करने के लिए दोनों को एक साथ देखना होगा। इतना कहकर जिन्न जादू से पल भर में चीन की उस काल कोठरी में पहुंच गया, जहां शहजादी को बंद किया गया था। कुछ ही देर में जिन्न ने सोती हुई शहजादी को लाकर शहजादे के बगल में लिटा दिया।
दोनों को देखकर परी ने कहा कि शहजादा ज्यादा सुंदर है और जिन्न ने गोर बादशाह की बेटी बदौरा को अधिक खूबसूरत बताया। जब देर तक कोई फैसला नहीं हुआ, तो दोनों एक दूसरे से बहस करने लगे। तभी शहजादे की नींद खुली और अपने पास एक खूबसूरत लड़की को देखकर वो हैरान रह गया। उसने मन ही मन सोचा कि शायद यह वही लडकी है, जिससे उसके पिता उसकी शादी कराना चाहते हैं। यह सोचकर शहजादे को अपने फैसले पर पछतावा हुआ।
कुछ देर शहजादा उस लड़की को यूं ही देखता रहा, तभी उसकी नजर लड़की के हाथ पर पड़ी। लड़की ने हाथ में नीले रंग की एक खूबसूरत अंगूठी पहन रखी थी। कमरुज्जमां ने उस लड़की से शादी करने का फैसला किया और लड़की की अंगूठी से अपनी हीरे की अंगूठी बदल ली।
अंगूठी बदलते ही शहजादा फिर से गहरी नींद में चला गया और तब लड़की की नींद खुली। बदौरा ने जब कमरुज्जमां को अपने बगल में देखा तो वह भी हैरान रह गई। शहजादे की सुंदरता और खूबसूरती ने उसे भी मोह लिया और वह भी मन ही मन खुद को कोसने लगी कि आखिर क्यों उसने शादी से इनकार किया। उसने सोचा शायद यही वो शहजादा है, जिसे पिता ने मेरे लिए चुना था।
तभी अचानक बदौरा की नजर अपने हाथ में मजूद हीरे की अंगूठी पर पड़ी, यह उसकी अंगूठी नहीं थी। यह देख कर उसे और भी हैरानी हुई। इस पर उसने शहजादे का हाथ देखा तो शहजादे के हाथ में उसे अपनी नीली अंगूठी दिखी। उसे लगा कि शायद बेहोशी में ही माता-पिता ने इस सुंदर लड़के से मेरी शादी करा दी है। यह सोचते-सोचते अचानक शहजादी भी बेहोश होकर गहरी नींद में चली जाती है।
उधर बहस करते-करते परी और जिन्न भी थक चुके थे। इसलिए उन्होंने बदौरा को वापस उसकी काल कोठरी में ले जाने का फैसला किया। फिर क्या था, जिन्न ने जादू किया और पल भर में परी और जिन्न शहजादी को लेकर उस काल कोठरी में पहुंच गए, जहां शहजादी को बंद करके रखा गया था। दोनों ने शहजादी को काल कोठरी में ठीक वैसे ही लिटा दिया जैसे वह पहले सो रही थी। उसके बाद परी और जिन्न अपने-अपने रास्ते चल देते हैं।
अगली सुबह जब कमरुज्जमां जगा तो उसे वह लड़की नहीं दिखी, जो रात में उसके बगल में सोई हुई थी। इस पर शहजादा बेचैन हो जाता है और सोचता है कि उसके पिता ने उसके जागने से पहले ही शायद शहजादी को बुलवा लिया होगा। इस ख्याल के साथ शहजादा सैनिकों से उस लड़की के बारे में पूछता है। मगर, सभी सैनिक किसी भी लड़की के वहां आने से इनकार कर देते हैं। सैनिकों की बात सुनकर शहजादा आपा खो देता है और सैनिकों को मारने पीटने लगता है।
जब इस बी आत की खबर बादशाह को होती है तो वह भी हैरान रह जाते हैं और हकीकत जानने के लिए बेटे से मिलने पहुंच जाते हैं। कमरुज्जमां से बात करके बादशाह उसे बहुत समझाने की कोशिश करते हैं कि वहां कोई भी लडकी नही आई और न ही उन्होंने किसी लड़की को उसके पास भेजा था। बादशाह शहजादे से कहते हैं, “बेटा तुमने जरूर कोई सपना देखा होगा”। मगर, शहजादा मानने को तैयार न था कि जो कुछ भी रात को हुआ वह एक सपना था। थक हारकर बादशाह अपने सेवकों से कहते हैं, “जाओ, किसी हकीम को लेकर आओ। लगता है कि शहजादे की तबीयत ज्यादा ही बिगड़ गई है।”
