Alif Laila Story - ( Part - 3 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी ( 5033 )

Alif Laila Story - ( Part - 3 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी

Alif Laila Story - ( Part - 3 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी
Alif Laila Story - ( Part - 3 ) कमरुज्जमां और बदौरा की कहानी


इतना सुनते ही शहजादे ने अपने पिता को उस लड़की की नीले रंग की अंगूठी दिखाई। उसे देखकर बादशाह हैरान हो गए। उन्होंने सबसे पूछवाया कि वह नीला रत्न कौन सा है, लेकिन उनके राज्य में और पूरे फारस में ऐसा रत्न किसी ने नहीं देखा था। तब राजा ने शहजादे को कहा कि तुम चिंता मत करो हम उस लड़की को ढूंढ निकालेंगे। हम उसे इधर ढूंढते हैं और तुम हमारे नदी के किनारे वाले महल में चले जाओ। वहां परदेसी भी आते हैं। तुम उनसे इस रत्न के बारे में पूछ सकते हो। शहजादा इस बात को मान गया और नहा धोकर अपने नदी किनारे वाले महल के लिए निकल पड़ा।

वहीं दूसरी ओर चीन में गोर बादशाह की बेटी बदौरा का हाल भी कुछ ऐसा ही था। उसने भी सुबह होते ही अपने बगल में सो रहे लड़के के बारे में पूछा। सब उसके सवालों से भी परेशान हो गए। जब लड़की ने अपने पिता को हीरे की अंगूठी दिखाई, तो बादशाह गोर भी हैरान हो गए। यह हीरे की अंगूठी उनकी बेटी की नहीं थी। काफी सोचने-विचारने के बाद भी जब कुछ समझ न आया तो उन्हें लगा कि उनकी बेटी पागल हो गई है। कही से वह यह अंगूठी पा गई है और कह रही है कि उसे कोई खूबसूरत लड़का दे गया है।

इस विचार के साथ कि उनकी बेटी बदौरा की मानसिक स्थिति काफी खराब हो गई है, उन्होंने अपनी बेटी को सोने की जंजीरों से बंधवा कर दूसरी काल कोठरी में डाल दिया। साथ ही इस बात का भी एलान करा दिया, “जो भी मेरी बेटी को ठीक करेगा। मैं उससे अपनी बेटी की शादी करा दूंगा। साथ ही उसे अपने राज्य का नया राजा भी घोषित करूंगा।” इसके साथ ही बादशाह ने एक शर्त भी रख दी कि उसकी बेटी को ठीक करने का दावा करने वाला अगर असफल रहा तो उसे मौत की सजा दे दी जाएगी। इस घोषणा के बाद कई हकीम शहजादी को ठीक करने के लिए आए, लेकिन शहजादी को ठीक नहीं कर पाए। इस कारण बादशाह ने ऐलान के अनुसार उन्हें मौत की सजा दे दी।

तभी एक दिन शहजादी का मुंहबोला भाई मर्जुबन दूसरे देश से चीन लौटा। वहां पहुंचते ही उसे शहजादी बदौरा के बारे में पता चला। वो तुरंत लड़की का भेष बनाकर किसी तरह से उस काल कोठरी में पहुंच गया। उसने शहजादी के पास जाकर कहा कि मैं लड़की के भेष में मर्जुबन हूं। हम दोनों ने बचपन में एक ही मां का दूध पिया था। इस नाते तुम मेरी बहन हो और हम दोनों एक साथ खूब खेले हैं, तो तुम मेरी दोस्त भी हुई। इसलिए मुझे बताओ आखिर हकीकत क्या है? ऐसा क्या रोग तुम्हें लग गया, जिसके कारण बादशाह नें तुम्हे यूं बेड़ियों में बांध के रखा है।

बदौरा ने कहा, “मर्जुबन तुम दूसरों की तरह मुझे रोगी मत कहो। इतना कहने के बाद शहजादी ने उसे अंगूठी और उस रात के बारे में बताया।” यह सब सुनकर मर्जुबन हैरान हो गया। उसने कहा कि वैसे तो तुम्हारी बात यकीन करने लायक नहीं है, फिर भी मुझे तुम पर भरोसा है। अब तुम चिंता मत करो, मैं उस लड़के को कहीं से भी ढूंढकर तुम्हारे पास लाऊंगा। इतना कहकर वो वहां से छुपते-छुपाते निकल गया।

अब मर्जुबन हीरे की अंगूठी वाले लड़के की खोज करने लगा। जब चीन में उसे ऐसे किसी लड़के के बारे में पता नहीं चला तो वह चीन से बाहर निकल पड़ा। करीब छह महीने तक वो हर जगह जाता और हर किसी से ऐसे लड़के के बारे में पूछता, जिसके पास नीली अंगूठी हो या ऐसा कोई जो किसी लड़की को ढूंढ रहा हो। कई जगहों पर घूमते-घूमते एक दिन मर्जुबन एक अंजान जहाज में बैठ गया। वह जहाज मर्जुबन को उस जगह ले गया, जहां शहजादा कमरुज्जमां था।

तट पर पहुंचने से पहले ही एक भयानक तूफान आया, जिसकी वजह से वह जहाज तहस-नहस होकर डूब गया। मर्जुबन अच्छा तैराक था, इस कारण वह बच गया और लकड़ी के एक तख्ते के सहारे खुद को किनारे तक ले आया। उस वक्त शहजादा कमरुज्जमां तट पर ही मौजूद था। उसने दूर से देखा कि कोई अनजान व्यक्ति समुद्र में डूब रहा है। शहजादे ने अपने सैनिकों को भेजकर उसे बचाकर लाने का आदेश दिया। जान बचने के बाद भी मर्जुबन खुश नहीं था। उसे इतना उदास देखकर लोगों ने शहजादे को मर्जुबन के बारे में बताया।


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